पींदो

2025-12-24 9 views

पींदो

ऊ ज्हाँ खड्यो छो

ऊ नै कबरबिज्जू कै नाई व्हाँ ई खोदबो सुरु कर द्यो

ऊ खोदतो ग्यो खोदतो ग्यो

अर पींदो है’रबा की छटपटाहट मे

खूनमखून कर ल्या हाथ

पण पींदो नं पायो

अर उ थाक’र वां इं बैठ ग्यो

मईना बीत ग्या साल बीत ग्या

ऊ बैठ्यो रह्यो आँख्याँ मींच’र कोई तपस्वी कै नाई

घणा सालाँ बाद जद ऊ की आँख खुली

तो सामै नीळो आकास छो

ऊ का काँधाँ पै कैई पंछी वाँ का घोंसला में बैठ्या छा

कैई जीव ऊ का डील में छोटा छोटा सुराग कर चुक्या छा

ऊ आपणा प्हैली का कद सूँ दस पंद्रह फीट ऊँचो होग्यो छो

अचानक ऊ नै अहसास होयो

पींदो मलबा को

ऊ कै पाँवां सूँ खड़ी जडाँ पींदो है’र आयी छी

घणी गहराई में

अब ऊ नै बढ़णो छो ऊपर

घणो ऊपर।