प्रणय की प्रेयसी

2025-12-17 • 2021

प्रणय की प्रेयसी

इस कविता संकलन का शीर्षक भी मानीखेज है - प्रणय की प्रेयसी! और कवि का नाम किशन प्रणय है। कवि अपने उपनाम प्रणय का काव्यात्मक के साथ आत्मकथात्मक इस्तेमाल भी करते हैं। ऐसा करने से भाषा और अभिव्यक्ति का सौंदर्य बढ़ जाता है। इस संकलन की भाषा धर्मवीर भारती की कनुप्रिया की याद दिलाती है। किशन प्रणय युवा कवि हैं जो अपनी भाषा की तलाश बहुत शिद्दत से करते हैं। - कृष्ण कल्पित यहाँ यह बात भी स्पष्ट होती है कि कवि के तौर पर ‘प्रेम’ को यहाँ किसी ‘मेनेरिज्म’ या प्रचलित परिपाटी के स्तर से निर्वहन करने का प्रयास भी नहीं किया गया है। इसे प्रत्येक दृष्टि में सराहनीय प्रयास माना जाना चाहिए कि अपने काव्य-सृजन के प्रारम्भिक पढ़ाव में ही एक युवा कवि मन की अंतर्वस्तु को लेकर गंभीर-सहज तथा स्वाभाविक रूप से उपस्थित होता है। प्रेम के विभिन्न बिंबों-प्रतीकों तथा उपमाओं के माध्यम से वर्ण्य विषय की अभिव्यंजना एवं प्रभावशीलता भी स्पष्ट रूप से चिह्नित की जा सकती है। - प्रो. कुंदन माली